Saturday, August 8, 2015

World Breast Feeding Week 1 August to 7 August 2015

स्वस्थ बालयकाल स्वस्थ जीवन.  आज भी लोगों में ऐसा विश्वास है की नवजात शिशु का पहल साल बहुत ही महत्वपूर्ण होता है.  बच्चे की रोगों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता काम होती है. ऐसा मन जाता है की जो बच्चे एक साल तक काम बीमार पड़ते है वे आगे भी स्वस्थ रहते है. शिशु को स्वश्थ रखने और उचित पोषड में स्तनपान का महत्वपूर्ण योगदान है. प्रसव उपरांत बच्चे को एक घंटे के अन्दर माँ का गढ़ दूध जिसे कोलोस्ट्रम  कहते है देने से बच्चों की रोगों के  प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है.  तथा छः  माह तक केवल माँ का दूध पीने से बच्चे इन्फेक्शन से बचे रहते है यह एक कुदरती वैक्सीन है ।  यही नहीं माँ का दूध पीने वाले बच्चे ऊपर का दूध पीने वाले बच्चों की तुलना में अधिक बुद्धिमान होतें है, यही नहीं स्तनपान    करवाने से माता का स्वास्थ्य भी अच्छा रहता है. आज महिलाये घर के अतिरिक्त बहार की ज़िम्मेदारी भी उठा रही है।  इस दोहरी ज़िम्मेदारी में हमारी अगली पीढ़ी दुष्प्रभावित न हो इसका हमें ध्यान देना है.  कामकाजी महिलाएं आपने शिशु को स्तनपान करा सके यह अत्यावश्यक है. इस परपेक्ष में  सुरक्षा नीति अत्यंत महत्वपूर्ण है जो महिलाओं को सम्मान पूर्वक कार्य करने का अधिकार देती है.  स्तनपान करने वाली महिलाओं के लिए कार्यस्थल में पालना घर की सुविधा तथा दिन में दो बार बच्चे को स्तनपान के लिए अवकाश सम्मिलित है.  संवेदना ने सतनवाड़ा जिला शिवपुरी में जा कर  प्रसूताओं से मुलाकात कर उन्हें स्तनपान करने के सही तरीके एवं लाभ के विषय में बताया. सामान्य तौर पर शिशु को १०-१२ घंटे तक  स्तन पान न कराने  कि  भ्रान्ति को कोलोस्ट्रम  की जानकारी दे कर दूर करने का  किया तथा नयी प्रसूता को  घंटे घंटे पर स्तनपान करे के लिए प्रेरित किया.  कामकाजी महिलाओं को उनके मातृत्व सम्बन्धी अधिकारों के विषय में जानकारी प्रदान करी.